सीधे नुक्कड़ से… अब शादी कर लो।

सीधे नुक्कड़ से… अब शादी कर लो।

नुक्कड़, दुनियाभर के entrepreneurs का उद्गम स्थल। मोहल्ले में अक्सर शाम होते होते, गली की महिलाऐं अपने पति के इंतज़ार में, घर के बाहर वाले चबूतरे पर बैठ सब्ज़ी काटती है। जब चार से अधिक महिलाऐं उस चबूतरे पर उपस्तिथि दर्ज करा देती है, तब ये बात समझने में कतई देर नहीं करनी चाहिए की अब, मोहल्ले के कुवांरों का छौंका लगने वाला है।

सीधे नुक्कड़ से... अब शादी कर लो।

यद्यपि आप एक अच्छी नौकरी कर रहे है, तो ये महिलाएं आपकी शादी के लिए उतनी ही चिंतित हो जाएँगी, जितना कभी आम आदमी पार्टी जनलोकपाल के लिए थी। इन सब महिलाओं में से कुछ महिलाएं, कॉलोनी के कुंवारे बालक-बालिकाओं का बीड़ा अपने कंधे पर ले, पूरे सामर्थ्य के साथ रिश्ते मिलाने में जुट जाती है। हाथ में शहर की लड़िकयों के चित्रों से भरा एल्बम लिए, सुंदरता के घटते क्रम में लगा कर, ये महिलाये शादी के संस्थान का जीर्णोद्धार कराने में जी-जान से लग जाती है। मेरे ख्याल से, शादी डॉट कॉम, जीवनसाथी डोट कॉम इत्यादि के संस्थापकों को भी ये आइडिया, बचपन में शाम को अपनी अम्मा के साथ मटर छीलते हुए ही आया होगा।

वैलेंटाइन वीक और शादियां एक दुसरे की पूरक होती है। नाम से पुकारे जाने वाली, आपसे दो साल बड़ी लड़की, न जाने कब आपकी भाभी बन जाती है। हाँ, ये वही लड़की है जिसके साथ आप बचपन में सितौलिया खेला करते थे और एक बार आपने गेंद की जगह सीधे सितौलिया की फर्श ही फेंक कर मार दी थी। चोट के निश्चान आज भी संजीव है। बचपन के उसी मार्क को, अपनी पार्लर वाली दीदी के अथक परिश्रम से छुपाते हुए, परसो उसकी शादी होने वाली है। यहाँ ज़रूरी ये है आप उस शादी में कम से कम उपस्तिथ रहे। इसलिए नहीं की, हम आपको टेंट हाउस के लड़कों के साथ पांचवी मज़िल तक कुर्सियां उठाने का “अतिरिक्त प्रभार” दे रहे है। बल्कि इसलिए नहीं जाना चाहिए क्योंकि वहाँ पर उन आंटियों का गुट भी मौजूद रहेगा, जो आपको फॉर्मल कपड़ो में , ऑफिस के जीवन में लिप्त होते देख रहीं है।

कभी-कभार ये भी हो सकता है की आंटी आपको दहीबड़े के बहाने रोक, उस लड़की से परिचित कराए जिसने आपको इंस्टाग्राम पर कभी फॉलो बैक नहीं किया। और अब उस देवी लिए ये जानना जरुरी हो गया है की आप पिछले महीने फरहान अख्तर के शो में कहाँ खड़े थे, क्योंकि मैडम भी वहाँ अपने चरण कमलो के साथ उपस्तिथ थी। इंस्टाग्राम पर भले ही व्यक्ति, “प्रदर्शन” में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर ले, लेकिन समन्वय तभी संभव है जब व्यक्ति असलियत में अपने “दर्शन” के साथ न्याय करे। फॉलो बैक इसीलिए नहीं हो पाए आप। उस शादी में काफी लड़किया है जो हील के आधार पर 5’10” की आसमानी उचाई की ओर अग्रसर है। आपसे सविनय निवेदन है की ‘पैकेज के प्रश्नों’ का जवाब उसी भाषा में दें, जिस भाषा में कॉफी मशीन शास्रार्थ कर रही है।

शादी, गणित की वो थ्योरम है, जिसके सही हल पर पूरे अंक पक्के है बशर्त आपकी एक स्टेप गलत नहीं होनी चाहिए। क्योंकि एक गलती कड़ी और पूरा उत्तर गलत। और नुक्कड़, उस बदमाश दोस्त की तरह है जो आपसे हमेशा कहेगा की नहीं आ रहा है तो छोड़ दे पेपर, स्टेप्स के अंक तो मिल ही जायेंगे। पर अगर आप अच्छा एवं ऐसा परिणाम चाहते है जिस पर जीवन भर आपको गर्व हो, तो सब्र करे, क्या पता आपका हमसफर भी किसी आंटी के दहीबड़े वाली साज़िश का हिस्सा हो रहा हो।

जय हिन्द।

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