सीधे नुक्कड़ से… घर का “मोदी” लंका ढाये…

सीधे नुक्कड़ से… घर का “मोदी” लंका ढाये…

नुक्कड़, दुनिया का सबसे तेज़ एग्जिट पोल।  जिन लोगो को एग्जिट पोल नहीं मालूम, वो कुछ इस तरह समझें की  जिस प्रकार आप बारवीं की परीक्षा के बाद, प्रश्न-पत्र का पोस्ट-मॉर्टम कर, अंक और प्रतिशत जोड़-घटाने में लग जाते थे, ठीक उसी तरह एग्जिट पोल में, देश के बड़े बड़े न्यूज़ चैनल अपनी तथाकथित “उत्तम पत्रकारिकता” का नमूना देते हुए, देश  में हुए चुनावो का ब्यौरा देते है। हाल फिलहाल में भारत तीन पूर्वोत्तर राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। हर बार की तरह इस बार भी हमारे देश की जनता ने इन राज्यों के चुनावों को उतनी ही तवज़्ज़ो दी, जितनी तवज्ज़ो न्यूज़ चैनल सीरिया के मासूमों को देते हैं । मतलब ना के बराबर।  अब सात बहन राज्यों में से छः  में “भगवा” सरकार है। ये बात मुझे हमेशा से चकित करती रहेगी की २ सीट जीतकर भी कोई कैसे सरकार बना सकता है । जी हाँ मेघालय, केवल २ सीट। लगता है देश का ‘लेफ्ट’ हैंड, अब ज़रा कमज़ोर हो रहा है।

जिस पल से मेरी माँ को ये पता चला है की एक ज्वेलरी बेचना वाला,  देश की सरकार के गालो पर 12 ,717 करोड़ की चपत लगा कर गया है, मेरी भोली माँ सराफा के हर “सुनार” को उसी हिकारत भरी नज़रो से देखती है, जिस नज़र से वो शराब दुकानों को देखती है। अब शराब की दुकान को क्यों, इसीलिए, क्योंकि एक शराब वाला भी 9,000 करोड़ का चूना लगाकर अंग्रेज़ो के शरण पा चूका है। वैसे मेरी माँ का इस सुनार और शराबी से कोई निजी ताल्लुक नहीं है, ना ही उनका P.N.B. में कोई खाता है।  ये दरअस्ल हर भारतवासी  के मन के भीतर की भड़ास है, जो इन महानिभावों पर निकल जाती है। भड़ास के बारे में आप सीधी सी बात समझ ले की, “भड़ास कैन निथर बी क्रिएटेड, नोर बी डिस्ट्रोएड, इट कैन ओनली ट्रांसफर फ्रॉम रिच टू  पुअर पापुलेशन ऑफ़ इंडिया “।

मेरी माँ का गुस्सा भड़ास की श्रेणी में “आदर्श” का स्थान प्राप्त करता है। 2 मिनट गुस्सा हुयी ,फिर अपनी दुनिया, पूजा-पाठ में लीन।  लेकिन देश की वो संस्था, जो 1975 से लेकर आज तक हर भड़ास का प्रतिदिन अनुसरण करती  है, वो और कोई नहीं, नुक्कड़ ही है। नुक्कड़ आज भी रवींद्र जडेजा को, फाइनल मैच में उस रनआउट के लिए माफ़ नहीं करेगा, ना ही माफ़ करेगा जे.के. रोलिंग को और ना ही अरविन्द केजरीवाल को। नुक्कड़ इस बात का माद्दा रखता है की देश के किसी भी बड़े आदमी, खासकर “विवादपादस्य आदमी” को कैसे भरे बाजार में नीलाम करना है।  नीरव मोदी आजकल हिट लिस्ट में है। नुक्कड़ पर वो व्यक्ति भी अम्बानियों को धमकी देता हुआ नज़र आ जाता है, जो खुद अपनी बीवी की कमाई खाता है। और तो और, महिला सशक्तिकरण का चोँगा पहने ये इंसान आसानी से बच भी जाता है। “मेरी बीवी घर की मर्द है”। नी यार …

सीधी सी बात ये है, की काले धन के नाम पर निर्वाचित सरकार को अगर इस बात का भी पुख्ता सबूत चाहिए की जो भगा है, वो भगोड़ा है की नहीं, तो ये समझने में देर नहीं करनी चाहिए की आने वाले चुनावों में दोनों पार्टियाँ, विकास नहीं, इतिहास के नाम पर वोट माँगेंगी।  ठीक वैसे ही जैसे आजकल के चलते-पूर्जे रिश्तों में जब भी  खटास आती है,  तो प्रेमी अपनी प्रेमिका को पुराने दिन याद कराते हुए कहता है, ” बेबी हम तब कितने खुश थे, चलो इस रिलेशनशिप को एक और मौका देते है ना… प्लीज, अच्छे दिन ज़रूर आएंगे। ”  लेकिन अगर आपको देश की और अपने  प्यार की मूर्ति  को गिराने से बचाना है तो वो करे, जो हाल फिलहाल गुजरात की जनता ने किया, ना ही ढंग से जीतने दिया और ना ही हारने।

चुनाव आने वाले है, वोट भी करना है, बस इस बात पर विचार करना बहुत ज़रूरी है की पहले क्या बनेगा, देश या मंदिर ???

जय हिन्द।   

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